आज का मुद्दा

साजिश पर सुप्रीम का फैसला

20 Apr 2017

बाबरी विध्वंस के करीब 25 साल बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आड़वाणी, मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, विनय कटियार समेत 13 नेता एक बार कोर्ट के कटघरे में खड़े होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई की याचिका पर इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामला चलाए जाने का फैसला सुना दिया। लखनऊ कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी और दो साल तक लगातार केस चलेगा।




दरअसल पूरे मामले की जांच कर रही सीबीआई ने दिसंबर, 1992 को दो एफआईआर दर्ज की थी पहली अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ जिनपर मस्जिद को ढहाने का आरोप था। इसकी सुनवाई लखनऊ कोर्ट में हुई थी। वहीं दूसरी एफआईआर आडवाणी, जोशी और अन्य लोगों के खिलाफ थी। इन सभी पर मस्जिद ढहाने के लिए भड़काऊ स्पीच देने का आरोप था। यह केस राय बरेली के सेशन कोर्ट में चला था। 2001 में स्पेशल कोर्ट सीबीआई ने आडवाणी, जोशी समेत सभी लोगों को बरी कर दिया था इसके बाद फैसले को सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी।  2011 में सीबीआई ने ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। हालांकि जिन लोगों पर आपराधिक मामला चलाए जाने का फैसला सुनाया गया उनके मुताबिक ये कोई साजिश नहीं थी बल्कि सबकुछ सबके सामने था।




कोर्ट के इस फैसले का राजनीति पर भी असर पड़ेगा इसमें कोई दो राय नहीं। आडवाणी और जोशी राष्ट्रपति की दौड़ में शामिल होना बताए जा रहे है तो पहले इसी तरह के कोर्ट के एक मामले में मुख्यमंत्री पद गवां चुकी उमाभारती अब केंद्रीय मंत्री है। यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही राममंदिर निर्माण के मामले में लगातार बयान सामने आए है। ये एक ऐसा मुद्दा रहा है जिसने बीजेपी को राजनीतिक फायदा ज्यादा दिलाया है। लेकिन 25 सालों में बीजेपी इस कोर इश्यू को छोड़ विकास के ऐजेंडे पर आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में अब ये फैसला फायदेमंद होगा या परेशानी का सबब बनेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है।




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