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नटरवलाल को गधा कहलाना मंजूर नहीं ! लेकिन इन दिनो उसी के नाम पर चल रही है सियासत

24 Feb 2017

पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने गुजरात के गधों वाले विज्ञापन का सहारा लेकर अप्रत्यक्ष तौर से प्रधानमंत्री मोदी पर हल्ला बोला था। जिसके पलटवार में मोदी ने कहा था कि गधों से भी प्रेरणा मिलती है। ताजा मामले में हार्दिक पटेल ने 44 पाटीदार विधायकों को ही गधा बता दिया। एक तरफ देशभर में गधे को लेकर सियासत गर्म है, तो दूसरी ओर होशंगाबाद के रामजी बाबा मेले में एक गधा ऐसा भी दिखा जो चर्चा में तो था, लेकिन इन सियासी बयानबाजियों से कोसों दूर था। 



माफ कीजिएगा इसे गधे की पहचान केवल गधे के तौर पर नहीं है, बल्कि इसका एक अदद नाम भी है। इसका मालिक इसे बड़े शान से नटवरलाल कहता है। यही नाम उसकी पहचान है। यूं तो मेले में रोज हजारों की तादाद में लोग आते रहे, लेकिन नटवरलाल से मिलने वालों की भी कमी नहीं थी। इसके लिए महज 20 रुपए टिकट रखा गया। जहां नटवरलाल अपनी कला से बता रहा था कि उसे गधा कहलाने में एतराज है। 



दर्शकों में कौन नहा कर नहीं आया ? कौन विदेश यात्रा कर चुका ? इन सब सवालों का जवाब नटवरलाल आसानी से दे देता।  मालिक के पूछने पर वो संबंधित शख्स के सामने जाकर खड़ा हो जाता। मेले में जब उससे पूछा गया कि बताओ विदेश से कौन आया है ? ये सुनते ही तो वो एक एनआरआई पर्यटक के पास जाकर खड़ा हो गया। 



कुछ साल पहले आगरा के रहने वाले जयराज गोस्वामी ने उसे केवल 75 रुपए में खरीदा और ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग से नटवरलाल में गजब का परिवर्तन आया। उसके हाव-भाव ही नहीं बदले, बल्कि अब तो वो सच में किसी को भाव नहीं देता। क्योंकि वो खुद को किसी जैंटलमैन से कम नहीं समझता।  



नटवरलाल के शो से होने वाली आय से गोस्वामी परिवार सहित 10 परिवारों का घर चलता है। नटवरलाल को बेशक इस बात का इल्म नहीं होगा कि इन दिनो गधे के नाम पर सियासत गर्मा चुकी है। क्योंकि उसकी 'दुकान' तो इस गर्मागर्मी के बिना भी अच्छी चल रही है। 



ब्लॉगर : अब्दुल सलीम, बंसल न्यूज़, होशंगाबाद


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