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नहीं रहा हिन्दी का वो लेखक जिसके पहले ही उपन्यास की 15 लाख प्रतियां हाथों हाथ बीकी थीं

18 Feb 2017

तीन कविताएं और पत्रिकाओं के कुछ कॉलम लिखकर सोशल मीडिया में खुद को लेखक लिखने वालों की भरमार तो बहुत हो गई, लेकिन क्या आपको पता है कि एक लेखक ऐसा था जिसके पहले ही उपन्यास की 15 लाख प्रतियां बिक गई थी। जिसके पाठक करोड़ों की संख्या में थे। उनमें ज्यादातर विद्यार्थी, गृहणियां, सफर करने वाले, सेल्समैन जैसे लोग थे। उनके पाठक भी युवा थे। हम बात कर रहे हैं, राइटर वेद प्रकाश शर्मा की, जो अपनी लेखनी के बैस्ट सेलर रहे। 



"वर्दी वाला गुंडा" के उपन्यास ने कभी धूम मचा रखी थी। मानो सफर के दौरान ज्यादातर लोग किसी एक उपन्यासकार को पढ़ रहे हों, तो उसकी ख्याती का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिन्होंने लगभग आधा दर्जन फिल्मों को जीवंत कहानियां दी। 62 वर्ष की उम्र में वो 176 उपन्यास लिखकर दुनिया को अलविदा कह गए।

 


मीडिया रिपोर्टस के अनुसार  एकता कपूर के साथ काम करते समय जब कभी बालाजी के सीरियल नेरेटिव में फंसते, तो वेद प्रकाश को ही याद किया जाता था। जहां वो बताते थे कि सीरियल/फिल्म की कहानी को आगे कैसे बढ़ाया जा सके। 



वेद प्रकाश शर्मा साल भर से बीमार थे। उन्हें फेफड़े में संक्रमण हो गया था। मेरठ और मुंबई में उनका इलाज चला। 



उन्होंने जब लिखना शुरु किया तो कई कॉपियां भर डालीं। पिता को पता चला तो वेद प्रकाश को खूब मार पड़ी। मां ने पूछा तो पिता ने कहा बिगड़ गया, लेकिन बाद में जब पिता ने उनकी लिखीं कापियां देखी तो मुस्कुरा उठे। उन्होंने कहा तू तो काफी अच्छा लिखता है। 



ब्लॉगर- तजिन्दर सिंघ


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