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Weather छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए मौसमी खुशखबरी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ राज्य के अन्य स्थानों पर शनिवार को भी बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के दौरान बारिश की संभावना जताई है। चंबल, रीवा संभाग के साथ ग्वालियर, दतिया, अलिराजपुर और धार के कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।

मध्य प्रदेश का तापमान

भोपाल का अधिकतम तापमान 29.6  डिग्री, इंदौर का अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री, जबलपुर का अधिकतम तापमान 32.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

छत्तीसगढ़ का मौसम

छतीसगढ़ के किसानों के लिए मौसम विभाग ने अच्छी खबर दी है। विभाग ने दो अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी दी है। पूरे प्रदेश मे गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। बंगाल की  खाड़ी में  कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिसके कारण दो अगस्त को  भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि ये बारिश किसानों के लिए काफी लाभदायक है।

तापमान

रायपुर में अधिकतम तापमान 33.1डिग्री, बिलासपुर का  32.2डिग्री, जगदलपुर का  32.3 डिग्री, जबकि अंबिकापुर का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री दर्ज किया गया।

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क्या रंग लाएगी राहुल गांधी की रैंप पर चर्चा ?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उद्घोष कर दिया। शुक्रवार को लखनऊ में अपने हजारों कार्यकर्ताओं के बीच राहुल गांधी कुछ इस अंदाज़ में दिखाई दिए। कांग्रेस की सभाओं के पारंपरिक मंचों से उलट एक विशाल मंच के रैंप पर चलते राहुल, कार्यकर्ताओं के सवालों का न केवल जवाब देते दिखे, बल्कि एक दिन पहले संसद में दिखे उनके आक्रामक तेवर यहां भी जारी रहे।


उत्तरप्रदेश को लेकर राहुल गांधी की गंभीरता इस बात से भी समझ आई कि उन्होंने साफ कर दिया कि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को ही मौका मिलेगा। राहुल ये भी कहने से नहीं चूके कि कुर्ता फटेगा और गीला होगा तो ही मौका मिलेगा। शीला दीक्षित को सीएम उम्मीदवार बनाने के पीछे उन्होंने दिल्ली में 15 साल में किए गए विकास कार्यों का हवाला दिया। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी को अच्छा रिस्पॉन्स मिला।


चुनाव से पहले मोहरे सजाने और प्रचार के मोर्चे पर कांग्रेस सुर्खियां बटोरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। बीजेपी को केंद्र में और नीतीश कुमार बिहार में कामयाबी दिलाने वाले प्रशांत किशोर खुद कांग्रेस की रणनीति तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस के प्रचार का बदला हुआ अंदाज ये बयां भी करता है। यूपी से पार्टी का 27 साल का वनवास खत्म करना जहां पार्टी की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। वहीं सम्मानजनक सीटें हासिल करना राहुल गांधी के लिए भी कम जरूरी नहीं है।


भले ही यूपी में राज बब्बर, गुलाम नबी आजाद और शीला दीक्षित की जमावट कर कांग्रेस अच्छा होमवर्क करती दिख रही हो, लेकिन संगठन के मोर्चे पर कांग्रेस की खराब स्थिति छिपी नहीं है। वो भी उस उत्तर प्रदेश में जहां, समाजवादी पार्टी और बीएसपी का गहरा जनाधार है। बीजेपी भी 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दम दिखा चुकी है। अब बारी कांग्रेस की है। जिसके पास खोने के लिए कुछ नहीं, लेकिन अच्छे आंकड़े उसकी खराब सेहत के लिए बड़ा बूस्टर साबित होंगे। हो सकता है तब राहुल मजबूती से पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालकर मिशन 2019 में जुट जाएं।

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क्या राहुल गांधी की रैंप पर चर्चा रंग लाएगी?


         

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