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Weather कई इलाकों में घटाएं छाई, जमकर बरसे बदरा

मध्य प्रदेश के कई इलाकों में बदली का मौसम है। शुक्रवार सुबह से आसमान पर बादल छाए रहे। रात को होशंगाबाद, इटारसी, भोपाल जैसे शहरों में बारिश हुई। इसके बाद शनिवार दिन में भी मौसम ठंडा रहा। दमोह में शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे बूंदाबांदी हुई। शाम करीब 4 बजे आसमान पर घने बादल घुमड़ आए, तेज हवाएं चलना शुरू हो गई। फिर झमाझम बारिश हुई। करीब आधा घंटे तक जोरदार बारिश ने मौसम में ठंडक घोल दी। शुक्रवार को दिन का अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। 

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कर्मचारी v/s सरकार "बेचारी" !

काम को लेकर ढीला रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों को मध्य प्रदेश के पंचायत ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव ने नसीहत दी है। भार्गव ने कहा है कि योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कर्मचारी संजीदगी और जिम्मेदारी से काम करें। मंत्री गोपाल भार्गव की कर्मचारियों को ये नसीहत साफ बयां करती है कि ज़मीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन सरकार की मंशा के मुताबिक नहीं हो पा रहा है। हालांकि गोपाल भार्गव ने ये बात एक बड़े परिदृश्य और कमोबेश हर विभाग के संदर्भ में कही है। लेकिन उनका साफ मानना है कि कई बार कर्मचारियों के कम रुचि लेने की वजह से जरूरतमंदों तक पूरा फायदा नहीं पहुंच पाता और इसमें भी विशेषकर दिव्यांगों का ज़िक्र करते हुए मंत्री भार्गव चाहते हैं कि कर्मचारी बढ़ चढ़कर उनसे जुड़ी योजनाओं की दिशा में काम करने के लिए आगे आएं। हालांकि कर्मचारी संगठनों का मानना है कि योजनाओं के ठीक ढंग से लागू न हो पाने की वजह सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं।


भले ही भार्गव ने अपने सुलझे हुए अंदाज़ और हल्के-फुल्के तरीके से अपनी बात कही हो। लेकिन उनकी ये नसीहत कर्मचारियों की कार्यशैली पर कोई पहली टिप्पणी नहीं हैं। सरकार के अहम ओहदेदार कई मौकों पर अधिकारियों और कर्मचारियों को ठीक से काम करने की नसीहत दे चुके हैं। ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के जरिए पूरे डेढ़ महीने तक सरकार और प्रशासन योजनाओं की हकीकत की पड़ताल करता रहा। ज़ाहिर है सरकार की मंशा साफ है कर्मचारी बेहतर से बेहतर नतीजे दें, ताकि योजनाएं 100 फीसदी फायदा दें। वैसे भी ब्यूरोक्रेसी और प्रशासन ही वो कड़ी है जो सरकार और जनता के बीच रिश्ता बनाती है। सरकार की सारी योजनाओं को लागू करने का जिम्मा भी इसी कड़ी पर होता है। भले ही कर्मचारी वर्ग ये कह रहा है कि ये काम सिर्फ उनका नहीं। लेकिन ये भी सच है कि प्रशासनिक मशीनरी की जवाबदेही और ईमानदारी ही रिजल्ट की गारंटी देती है।

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क्या आप मानते हैं कि केंद्र सरकार का डिफेंस और सिविल एविएशन समेत तमाम सेक्टरों में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी का फैसला सही है?


         

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