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Weather सीजन का सबसे गर्म दिन


पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के ग्वालियर के जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई। बाकी बचे जिलों का मौसम साफ रहा। साथ ही दिन में शाजापुर का तापमान सामान्य से काफी तेज रहा। बाकी बचे जिलों के तापमान में खास उतार चढ़ाव नही देखा गया। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान की अगर बात करें तो, 47.0 डिग्री सेल्सियस तापमान प्रदेश के दमोह, राजगढ़ और श्योपुरकलां में दर्ज हुआ।


मध्यप्रदेश का तापमान


भोपाल का अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, इंदौर का अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबलपुर का अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।


छत्तीसगढ़ का तापमान


रायपुर में अधिकतम तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, बिलासपुर का अधिकतम 43.1 तापमान डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जगदलपुर का अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, अंबिकापुर का अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

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मध्य प्रदेश बीजेपी में नेताओं की आपसी खींचतान, रस्साकशी और असंतोष का आलम ये है कि नेताओं की जबान अब अनुशासन के तटबंधों को तोड़ने में जरा भी संकोच नहीं करती।


जिस पहले विवाद का जिक्र हम कर रहे हैं। उसमें शासकीय कार्यक्रम के मंच पर मंत्री गौरीशंकर बिसेन और सांसद बोधसिंह भगत का विवाद खुलकर सामने आ गया। संबोधन के लिए अपना नाम न पुकारे जाने से खफा सांसद भगत ने मंत्री बिसेन के खिलाफ खुलकर भड़ास निकाली।


अब बात कमल पटेल कि, बीजेपी से चार बार विधायक और मंत्री रहे कमल पटेल अपनी पार्टी और अधिकारियों से इस कदर नाराज हैं कि बगावत पर ही उतर आए हैं। नर्मदा सेवा यात्रा पर सवाल उठाकर वो पार्टी के निशाने पर आ गए और अब बीजेपी उन पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। हालांकि पार्टी के नोटिस के बाद पटेल के सुर नर्म पड़ गए हैं।


और आखिर में सागर के 73 वर्षीय सांसद लक्ष्मीनारायण यादव कि बात करें, जिन्हें लगता है कि केंद्र में बैठी उनकी अपनी बीजेपी सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे उपलब्धि माना जाए।


ये तमाम बयान, राय या असंतोष छोटे कार्यकर्ताओं के नहीं, बल्कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और नेताओं के हैं। ऐसे में बीजेपी क्या इसे महज बड़े कुनबे की छोटी-मोटी बात ही मानेगी।


बीजेपी की दिक्कत ये है कि ऊपरी स्तर पर बड़े नेता आपस में लड़ रहे हैं और नीचे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है? लगातार सत्ता में रहना कहीं इसकी वजह तो नहीं। नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती खाई भी चिंता की बड़ी वजह है। इन सबके बीच बीजेपी किस तरह अपने नेताओं को संयमित आचरण का संदेश देगी। ये बड़ा सवाल है।



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